भूख
"पढ़ा-लिखा व्यक्ति यदि किसी अनपढ़ और आपराधिक चरित्रवाले नेता की चमचागिरी करने लगे तो समझना चाहिए कि या तो उसकी भूख बहुत बड़ी है या फिर वह स्वयं उसी मानसिकता का व्यक्ति है।" "और जो अपराध पर मौन रहे वो?" "वह या तो अवसरवादी है या रीढ़विहीन। दोनों की कोई तीसरी गति नहीं है।" "मौन से याद आया, अज्ञेय तो मौन को भी सच की अभिव्यक्ति मानते थे।" "ठीक ही बात तो है। अरे भाई! सच का मतलब सिर्फ न्याय के पक्ष में ही खड़ा होना तो नहीं होता है। यह भी तो हो सकता है कि शोषक-शोषण के प्रति व्यक्ति की मौन स्वीकृति हो। है कि नहीं? वैसे जहाँ तक अज्ञेय की बात है, तो मुझे नहीं लगता है कि उन्होनें कभी खुलकर जन पक्षधरता की बात की होगी।" "तुम्हें ऐसा क्यों लगता है? तुम एक बड़े रचनाकार की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े कर रहे हो।" "सवाल तो है ही मेरे मन में।" "कैसा सवाल?" "यही कि शोषितों, पीड़ितों की बात करनेवाली प्रगतिवादी कविता का विरोध उन्होंने क्यों किया? मुझे लगता है कि अज्ञेय बुर्जुआ वर्ग के हिमायती थे। एक और बात है, जिसके कारण अज...