भारतीय रेलवे की कानूनन वसूली

पिछले कुछ दिनों से रेलवे टिकट के लिए परेशान था। भारतीय रेलवे के आधिकारिक ऐप आईआरसीटीसी पर एक-डेढ़ महीने के भीतर दूर-दूर तक कहीं कोई कन्फर्म टिकट उपलब्ध नहीं है। हर जगह वेटलिस्ट दिखा रहा है। मैंने सोचा कि रेलवे में काम कर रहे मित्र से मदद लेते हैं। मैंने उसे फोन किया। उसने मुझे जो बताया उसे सुनकर बहुत हैरानी हुई। मित्र ने कहा, "अब स्टाफ कोटा हटा दिया गया है। पहले वाला सिस्टम अब खत्म हो गया है, जब किसी के कहने से वेटलिस्ट टिकट कन्फर्म हो जाता था। हमलोग भी अब 'कन्फर्म टिकट ऐप' से टिकट कटाते हैं। कन्फर्म टिकट ऐप पर टिकट कटाने से टिकट के कन्फर्म होने की पूरी संभावना रहती है। वह ज्यादा पैसा इसीलिए चार्ज करता है। टिकट कन्फर्म नहीं करेगा तो उसे तीन गुना पैसा वापस करना होगा। यदि वह ज्यादा पैसा लेकर टिकट दे रहा है तो टिकट ले लो। उसके पास सीट होती है। टिकट कन्फर्म हो जाता है।"
        कन्फर्म टिकट ऐप यह दावा करता है कि वह टिकट कन्फर्म कर देगा। लेकिन इसके लिए वह अलग-अलग कोच के लिए अलग-अलग अतिरिक्त पैसा चार्ज करता है। मैं दो उदाहरण देता हूँ- पहला, गरीबरथ का किराया 1150 रुपया है। सीट वेटलिस्ट दिखा रहा है। लेकिन इस ऐप के मुताबिक 599 रुपया अतिरिक्त देने पर टिकट कन्फर्म हो जाएगा। यानी एक कन्फर्म टिकट के लिए कुल 1729 रुपया भुगतान करना होगा। लेकिन ऐप इसमें भी कुछ रुपया जोड़कर कुल 1805 रुपया ले रहा है। 76 रुपया किस बात के लिए अतिरिक्त जोड़ रहा है मालूम नहीं। यह तो हुई गरीबरथ की बात जो पूर्णतया वातानुकूलित ट्रेन है। अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों, जैसे राजधानी, तेजस आदि का क्या हाल होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
        दूसरा, मैं जहाँ के लिए टिकट लेना चाहता था, वहाँ के लिए स्लीपर का किराया मात्र 665 रुपया है। लेकिन दो महीने तक कोई सीट खाली नहीं है। सब में वेलटिस्ट लिखा हुआ है। लेकिन कन्फर्म ऐप कह रहा है कि हर वेटलिस्ट टिकट के कन्फर्म होने का चांस है। वह कन्फर्मेशन चांस का प्रतिशत भी बताता है। जैसे 90 प्रतिशत चांस, 95 प्रतिशत चांस आदि। चांस प्रतिशत की संख्या ऊपर-नीचे दी हुई है। यह चांस प्रतिशत इसलिए दिया रहता है ताकि यात्रियों में यह भ्रम बना रहे कि टिकट कन्फर्म होगा कि नहीं। सबसे ऊपर महीन अक्षर में यह भी लिखा होता है कि टिकट कन्फर्म हो जाएगा नहीं तो तीन गुना पैसा वापस दिया जाएगा। उसमें भी एक कॉलम और जोड़ दिया गया है, जिसमें यह ऐप कह रहा है कि अल्टीमेटम सीट चाहिए तो 665 रुपया की जगह 815 रुपया का भुगतान करना होगा। और यदि सीट कन्फर्म चाहिए और कन्फर्म न होने पर तीन गुना पैसा वापस चाहिए, तो प्रति व्यक्ति 399 रुपया अतिरिक्त देना होगा। यानी 665 रुपया के साथ 399 रुपया और 815 रुपया के साथ 399 रुपया अतिरिक्त देना होगा। 665 रुपया में हम 399 रुपया जोड़ते हैं तो कुल 1064 रुपया होता है। लेकिन ऐप 1102 रुपया ले रहा है। यहाँ भी वह 38 रुपया अतिरिक्त ले रहा है। किस बात के लिए ले रहा है कुछ पता नहीं। अल्टीमेट सीट लेने पर 815 रुपया में 399 रुपया जोड़कर ही ले रहा है। क्योंकि दोनों का योग 1214 रुपया होता है। लेकिन ऐप 1212 रुपया ले रहा है। यहाँ 2 रुपया कम है। 
        यह मात्र दो ट्रेनों का हाल है। जाहिर-सी बात है कि जब आईआरसिटीसी या कन्फर्म टिकट ऐप पर कोई ट्रेन खाली नहीं मिल रही है तो काउंटर पर भी नहीं ही मिल रही होगी। यात्री निर्धारित मूल्य में सही समय पर टिकट लेने के लिए परेशान हो रहे होंगे। या फिर चार-पाँच महीना पहले ही टिकट कटवा ले रहे होंगे। पता नहीं इतने महीने पहले भी टिकट उपलब्ध होता होगा कि नहीं। यही हाल रहा तो फिर काउंटर पर जाकर टिकट की लाइन में खड़ा होने का कोई औचित्य नहीं रह जाएगा। वैसे भी काउंटर पर जाकर लाइन में घंटों खड़े रहने में अब जनता की रुचि नहीं रही। लोग काउंटर छोड़ रहे हैं। सबके हाथ में एंड्रॉयड मोबाइल है। या तो खुद टिकट बना ले रहे हैं या फिर किसी न किसी की मदद ले रहे हैं। 
        तत्काल सीट की भी बड़ी विचित्र कहानी है। तत्काल टिकट बनाने वाले दलाल का कहना है कि अब तत्काल टिकट वहाँ से बनता है, जहाँ से गाड़ी बनती है। जैसे मान लीजिए कि कोई दिल्ली से पटना जा रहा है। लेकिन जिस गाड़ी से जाना चाहता है, वह मुंबई से आ रही है। तो उसको तत्काल टिकट का पैसा मुंबई से पटना का देना होगा। एक तत्काल टिकट बनाने का दलाल 700 रुपया से 800 रुपया माँग रहा है। खुद भारतीय रेलवे या यह कन्फर्म टिकट ऐप तत्काल टिकट का कितना रुपया चार्ज कर रहा है, यह देखना पड़ेगा। दलाल का कहना है कि दिल्ली से पटना जानेवाली गाड़ी का निर्धारित किराया यदि 800 रुपया है तो तत्काल टिकट के लिए 2000 रुपया देना होगा। यानी एक तत्काल टिकट पर 1200 रुपया अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। जितने का टिकट नहीं उससे डेढ़ सौ गुना कमीशन देना होगा। यह तो 'एक मन की मुर्गी, नौ मन का मसाला' वाली बात हो गई! है न विचित्र बात?
        मित्र का कहना था कि जो काम पहले दूसरे दलाल किया करते थे, अब वही काम कानूनी तरीके से कन्फर्म टिकट ऐप करने लगा है। और यह सब तब हो रहा है जब भारतीय रेलवे का पूरी तरह से निजीकरण नहीं हुआ है। जब निजीकरण हो जाएगा तब यह किस तरह से वसूली करेगा, यह देखना होगा। अभी तक जिन-जिन सरकारी सेवाओं का निजीकरण हुआ है और जिस तरह से उसके मालिकों ने जनता को चूसना शुरू किया है, उससे तो यही पता चलता है कि भारतीय रेलवे का निजीकरण हो जाने का परिणाम बहुत भयावह होगा। उदाहरण के लिए बिजली विभाग को देखा जा सकता है। स्मार्ट मीटर की मनमानी और इसके प्रति जनता का आक्रोश दोनों हमारे सामने हैं।
         यह कहने की कोई आवश्यकता नहीं है कि भारतीय रेलवे भारत का सबसे बड़ा सर्विस सेक्टर है और यह भी हम जानते हैं कि इस देश में प्रतिदिन लाखों-करोड़ों लोग रेल से यात्रा करते हैं। ऐसे में इसका निजीकरण होना और अतिरिक्त पैसा वसूला जाना दोनों कितना तकलीफदेह हो सकता है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। आईआरसिटीसी पर कोई कन्फर्म टिकट मिलेगा भी कि नहीं, टिकट काउंटर की उपयोगिता बचेगी भी या नहीं, या फिर सभी टिकट इसी तरह कमीशन पर कन्फर्म टिकट ऐप से ही लेना होगा यह आने वाले समय में पता चलेगा। फिलहाल तो महीने-दो महीने के भीतर की यात्रा के लिए कमीशन वाले कन्फर्म टिकट ऐप से ही मदद लेनी होगी। दूसरा कोई विकल्प नहीं बचा है।

डॉ. रमेश कुमार राज
मो. 8448971626
rvilas711@gmail.com

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