लघुकथा: शातिर चोर
सुबह के सात बज रहे थे। मैं हाथ में पानी का बोतल लेकर जिम के लिए घर से निकला। बिल्डिंग से उतरकर जैसे ही नीचे आया तो देखा कि चौराहे पर भीड़ लगी हुई है। घर के ठीक बगल में चौराहा है। चौराहे को एक पतला किंतु विषैला नाला काटता है। वहाँ एक छोटी-सी पुलिया है, जिसके ऊपर से होकर पूर्व-पश्चिम की ओर बीस फुटिया सड़क गई है। मैं जब भीड़ के पास गया तो देखा कि वहाँ दो-चार पुलिस भी हाथ में डंडा लिए खड़ी है। मेरी नजर 'राजन इलेक्ट्रिक दुकान' पर पड़ी। उसका शटर बीच में ऊपर की तरफ सिकुड़ा हुआ था। थोड़ी ही देर में सब समझ में आ गया कि दुकान में चोरी हुई है। "कितने बजे की घटना है?" मैंने एक आदमी से पूछा। वह व्यक्ति जवाब देता इससे पहले ही एक पुलिस ने डंडे से सबको हड़काया- "हटो यहाँ से। भीड़ खाली करो।" लोग इधर-उधर खिसक गए। मैं भी वहाँ से दस कदम दूर जाकर खड़ा हो गया। मैं देख रहा हूँ कि दुकान का शटर सिकुड़ा हुआ है। अंदर में शीशे बिखड़े पड़े हैं। चोरों ने अंदर वाला शीशे के दरबाजा तोड़ दिया है। अंदर मीडिया वाला कैमरा लेकर एक-एक चीज की फोटो खींच रहा है। दुकानदा...