लघुकथा: गद्दार कौन हैं?
मंच सजकर तैयार है। मंत्रीजी को देखने के लिए जनता मैदान में पहुँच चुकी है। चारों तरफ मंत्रीजी की पार्टी का पताका लहरा रहा है। कार्यकर्ता मुस्तैदी से पहरा दे रहे हैं। पुलिस बंदूक लिए चप्पे-चप्पे पर तैनात है। छूटभैय्ये मंत्री मंच को संभाले हुए हैं। भाषण दे रहे हैं, "जो भी भारतमाता की तरफ आँख उठाकर देखेगा, हम उसकी आँख निकाल लेंगे। एक-एक गद्दार को चुन-चुनकर पाकिस्तान भेजेंगे।" जनता के बीच से आवाज आती है, "भारतमाता की जय", "वंदेमातरम।" रामप्रसाद को एक बोतल दारू और पाँच सौ रुपया का भरोसा दिलाकर गाँव का सरपंच मंत्रीजी का भाषण सुनाने लाया है। उसके साथ और भी लोग हैं। आते वक्त पूरा ट्रैक्टर भरा हुआ था। मुखियाजी तो दस ट्रैक्टर भरकर आए हैं। रामप्रसाद ने अपने पड़ोसी से पूछा, "नेताजी गद्दार किसको बोल रहे हैं?" "मुल्ले को" पड़ोसी ने तपाक से जवाब दिया। "ऐसे ही मुल्लों की संख्या बढ़ती रही तो एक दिन हमें यह देश छोड़ना पड़ेगा।" उसने आगे कहा। रामप्रसाद चुप हो गया। मंत्रीजी साधु के वेश में आए। आते ही 'जयश्रीराम' का जोर से...