खाली जमीन
बंद कमरे में मंत्रीजी और सबसे बड़े उद्योगपति के बीच मीटिंग चल रही थी। उद्योगपति छोटे शहर में अपना पैर पसारना चाहते थे। उसने मंत्रीजी से कहा, "मुझे इस छोटे टाउन को शहर की तरह चमकाने के लिए करीब सौ एकड़ जमीन चाहिए। बदले में आपको जो चाहिए मैं देने को तैयार हूँ। कभी किसी सांसद-विधायक को खरीदना-तोड़ना हो तो वह भी हो जाएगा। आप हमें जमीन दीजिए, मैं आपको फसल दूँगा।" मंत्रीजी ने अपने सिर पर दो बार हाथ फेरा और कहा, "इंतजाम हो जाएगा। आप टांग पसारने की तैयारी कीजिए। मैं आपके लिए खाली जमीन की व्यवस्था करवाता हूँ।" मीटिंग खत्म हुई। उद्योगपति चले गए। मंत्रीजी ने अपने आदमियों से गाड़ी निकालने के लिए कहा। दस-पंद्रह गाड़ी तैयार हो गई। मंत्रीजी सुरक्षाओं से लैश होकर टाउन के दौड़े पर निकल गए। मंत्रीजी ने पूरा टाउन छान मारा लेकिन कहीं खाली जमीन नहीं मिली। नदी के किनारे एक बहुत बड़ा जंगली क्षेत्र जरूर था। उसी के कारण टाउन में ऑक्सीजन की थोड़ी-बहुत भरपाई हो रही थी। मंत्रीजी ने जंगल काटना मुनासिब नहीं समझा। उसने अपने असिस्टेंट से कहा, "सभी जगह के जंगल तो कट ही रहे हैं। लेकिन...