डॉ. रमेश ठाकुर की दस कविताएं
1 मुट्ठी भर लोगों के हाथ में सत्ता थी गिने-चुने ब्राह्मण थे ब्राह्मणों के हाथ में शिक्षा थी वे ही राजा के सबसे करीब थे पुरोहित थे, सलाहकार थे पूरे गाँव की जजमानी करके धन की उगाही करते थे फिर यह बात समझ से पड़े है कि वे दरिद्र कैसे रह गए क्या इसे भी कर्मफल कह सकते हैं? 2 एक बड़े दलित नेता को एक महिला जेल भेजने की धमकी दे रही है वह जेल जा भी सकता है इसमें कोई बड़ी बात नहीं है ना ही कोई नई बात है लगता है कि उस नेता ने महिसासुर से कुछ नहीं सीखा है सजा के नियम बदल गए हैं लेकिन नीयत अभी भी वही है जरूरी नहीं है कि अब भी हर किसी की छाती में त्रिशूल घोंपकर ही मारा जाए...! 3 अगर तुम्हारे हाथ से कोई कुत्ता रोटी छीनकर भाग जाए, उसके पीछे दौड़ो तो वह तुम्हें ही काटने को दौड़े तब तुम क्या करोगे? मुझे पक्का विश्वास है कि तुम ज्यादा बर्दाश्त नहीं करोगे और कुत्ते को घेरकर अच्छे से बाँस कर दोगे क्योंकि तुमसे मेरा एक शब्द बर्दाश्त नहीं हुआ है ज्ञान पेलना सरल है लेकिन बर्दाश्त करना? 4 नए-नए देवता अवतरित हो रहे हैं कल ये बे-दिमागी फिर कहेंगे कि इनकी देवताओं का अपमान हो रहा है लेकिन अब यह सवाल पूछना प...