कहानी: नयी कहानी- नामवर सिंह

 'कहानी: नयी कहानी' से नामवर जी के कुछ महत्त्वपूर्ण कथन: 


1. साहित्य की दृष्टि से कहानी स्वयं बहुत आधुनिक है। 

2. हिन्दी गद्य का अत्यंत निखरा हुआ रूप आज की कहानी में ही सबसे अधिक मिलता है। 

3. हिन्दी कविता की अपेक्षा कहानी में स्वस्थ सामाजिक शक्ति कहीं अधिक है और आज उपन्यास की तरह कहानी सामाजिक परिवर्तन के लिए जोरदार साहित्यशास्त्र का काम कर रही है। 

4. 'छोटे मुँह बड़ी बात' कहनेवाली कहानी के बारे में प्रायः 'बड़े मुँह छोटी बात' कही जाती है। 

6. कहानी का यह दुर्भाग्य है कि वह मनोरंजन के रूप में पढ़ी जाती है और शिल्प के रूप में आलोचित होती है। मनोरंजन उसकी सफलता है तो शिल्प उसकी सार्थकता। 

7. संभवतः जीवन के लघु प्रसंगों को लेकर लिखी जानेवाली कहानी स्वयं भी 'लघु' समझी जाती है। 

8. आज की कहानी नयी अनुभूतियों का सृजन कर रही है। 

9. नये कहानिकारों में मानवीय मूल्यों के संरक्षण, जीवन-शक्ति का परिप्रेषण एवं सामाजिक नवनिर्माण की उत्कट प्यास है। 

10. आज किसी कहानी का शिल्प की दृष्टि से सफल होना ही काफी नहीं है; बल्कि वर्तमान वास्तविकता के सम्मुख उसकी सार्थकता भी परखी जानी चाहिए। 

11. कहानी शिल्प संबंधी आलोचकों ने कहानी की जीवनी शक्ति का अपहरण कर उसे निर्जीव शिल्प ही नहीं बनाया है, बल्कि उस शिल्प को विभिन्न अवयवों में काटकर बाँट दिया है। 

12. असल बात है कहानी का कहनीपन। कविता में जो स्थान लय का है, कहानी में वही स्थान कहनीपन का है। कविता चाहे जिस हद तक छंदमुक्त हो जाए, लेकिन वह लयमुक्त नहीं हो सकती। लयमुक्त रचना काव्य होते हुए भी कविता नहीं कहलाएगी। वस्तु व्यंजना से रहित लय कोरे पद्य को जन्म देती है, उससे रहित कहनीपन कोरी आख्यायिका को।  

13.  कहानी की नाटकीयता और वस्तु स्थिति के संघर्ष की दृष्टि से भीष्म साहनी सबसे सफल कहानीकार हैं। एक इकाई के रूप में उनकी कहानियाँ अत्यंत गठित होती हैं; साथ ही प्रायः किसी न किसी प्रकार की विडम्बना को व्यक्त करती हैं और यह विडम्बना किसी न किसी रूप में हमारे वर्तमान समाज के व्यापक अंतर्विरोध की ओर संकेत करती है। 

14. एक सार्थक कहानीकार जीवन की छोटी से छोटी घटना में अर्थ के स्तर पर उद्घाटित करता हुआ उसकी व्याप्ति को मानवीय सत्य की सीमा तक पहुँचा देता है। ऐसे अर्थगर्भत्व को मैं सार्थक कहता हूँ। 

15. नयी कहानी संकेत करती नहीं, बल्कि संकेत है। 

16. तथाकथित आँचलिक कहानियों की जीवंतता मुख्यतः बिंबों द्वारा निर्मित वातावरण से ही उत्पन्न हुई। 

17. संगीत की जैसी सूक्षम संवेदना निर्मल वर्मा ने व्यंजित की है, वह कहानी की बहुत बड़ी उपलब्धि है। 

18. निर्मल वर्मा 'सोफिस्टीकेटेड' कहानीकार हैं। 

19. आधुनिक होने की होड़ में कहानीकार को स्वधर्म का भी तो कुछ ख्याल रखना चाहिए। 

20. शायद नयी कविता की हाट में जो मोती पुराने पड़ गए हैं, उन्हें कहानी की दुनिया में 'हीरा' कहकर बेचना ही अन्वेषण है। 

21. निःसन्देह कहानी बेहद नाजुक कला है। 

22. यह नहीं कहा जा सकता कि कहानी जैसे छोटे रूप में जीवन की मुख्य समस्याओं को नहीं उठाया जा सकता। यदि छोटी-छोटी कविताएँ यह कार्य कर सकती हैं तो कहानी भी कर सकती है। 

23. जागरूक कथाकार की हर कहानी उसके सामाजिक संघर्ष की दिशा में एक कदम होती है। 

24. 'आज की हिन्दी कहानी' के चरित्र हमारे जीवन की वास्तविकता के ऐतिहासिक विकास के प्रतीक हैं। 

25. सच्ची रचना वहीं से शुरू होती है जब लेखक अपनी स्मृति को जीवन संबंधी प्रचलित 'साहित्यिक' यथार्थ से मुक्त कर लेता है। 

26. निर्मल वर्मा की कहानियाँ गहरा प्रभाव छोड़ती हैं। 

27. फकत सात कहानियों का संग्रह 'परिंदे' निर्मल वर्मा की पहली कृति नहीं है बल्कि जिसे हम 'नयी कहानी' कहना चाहते हैं उसकी भी पहली कृति है। 

28. 'परिंदे' को देखकर लगता है कि भाषा के क्षेत्र में जो काम इतने दिन में प्रयोगशील नयी कविता भी न कर सकी उसे अंततः कहानी के गद्य ने कर दिखाया। 

29. निर्मल वर्मा के चरित्र कहीं-कहीं जीवन कि व्यर्थता में भी अर्थ खोजने की कोशिश करते दिखाई पड़ते हैं और निरुद्देश्य में भी एक उद्देश्य, एक आस्था की तलाश है। 

30. सार्त्र ने कहा है: "कहानी पढ़ने का मतलब है- आईने में कूदना।" 



पढ़कर टिप्पणी अवश्य करें। धन्यवाद॥ 

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