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मैं जिंदा हूँ : रमेश ठाकुर

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  “ ई के हई ?” “ अरे! ई त अपना मिडिल इसकूल के हेड माहटर साहब हैं! रामप्रसाद माहटर साहब।” “त ई मुहल्ले में काहे आए हैं ?” “होगा कउनों काम...!” फूलवती पूछ रही है और रामप्यारी उसे सब बता रही है। फूलवती मुहल्ले में नई-नई आई है। पिछले साल ही रजबा उसे ब्याह कर लाया है। इसीलिए अभी ज्यादा लोगों को वह नहीं पहचानती है। बड़े लोग जब गरीबों की बस्ती में घुस आते हैं तो वहाँ के लोगों में संदेह पैदा हो जाता है। भय और जिज्ञासा का द्वंद्व उसके मन में चलने लगता है। किसी छोटभइका से उसके पड़ोसियों के सामने यदि कोई बड़ा आदमी बात कर लें तो मजाल है कि उसके समाज का कोई आदमी उसके साथ तू-तू , मैं-मैं करे! अपने समाज में उसका दबदबा बढ़ जाता है। जीतन मुखिया को कौन नहीं जानता! मलाह समाज में ही नहीं , पड़ोस में जितने भी छोटी जाति के लोग हैं, उसमें उसका दबदबा है। अनिल मिश्र का खास है इसलिए। दिनभर उसी के घर पड़ा रहता है। पशु की देखभाल करना , नाद में चारा डालना , खेत - खलिहान का चक्कर लगाना , सारा काम वही करता है। आप जानते हैं अनिल मिश्र कौन है ? जिला न्यायालय का नामी वकील। पूरे मुहल्ले का मुकदमा व...