‘रामलला नहछू’: सामाजिक सौहार्द का सांस्कृतिक समारोह
‘ रामलला नहछू ’ सोहर छंद है , जिसमें 12 , 10 के विश्राम से 22 मात्राएँ होती हैं। ‘ रामलला नहछू ’ की रचना-तिथि का पता वेणीमाधवदास कृत ‘ गोसांई चरित ’ से मिलता है। उसके दोहा संख्या- 94 में लिखा है कि गोस्वामी जी ने इसकी रचना मिथिला प्रदेश में की है। जैसे- मिथिला में रचना किए , नहछू मंगल दोय। मुनि प्राँचे मंत्रित , किए सुख पावें सब कोय॥ इस दोहे के अनुसार तुलसीदास ने ‘ रामलला नहछू ’ की रचना मिथिला यात्रा के दौरान की थी। सीता का संबंध मिथिलांचल से है और राम का पुर्वांचल के नजदीक अयोध्या से। यहाँ केवल दो आत्माओं का ही नहीं , दो संस्कृतियों का भी परस्पर मेल है। डॉ. रामकुमार वर्मा ने भी इसका संबंध मिथिला की संस्कृति से जोड़ा है। वे कहते हैं - “इसमें कथा की सत्यता पर न जाकर प्रथा की सत्यता पर जाना चाहिए , राम का नहछू तो एक बहाना है।” 1 गोस्वामी जी ने मिथिला की संस्कृति का वर्णन कर जनकपुर के राजा जनक और जनक जननी सीता के मान की रक्षा की है। डॉ. रामकुमार वर्मा ने यह आरोप लगाया है कि यदि यह राम के विवाह का नहछू है , तो उसे मिथिला में होना चाहिए , क्योंकि राम विवाह के पूर्व अय...