अंधा युग (1955) : धर्मवीर भारती (मुख्यांश)
'अंधा युग' धर्मवीर भारती का हिन्दी काव्य नाटक है जिसका प्रकाशन सन् 1955 में हुआ। इसे गीतिनाट्य भी कहा जाता है। इसका कथानक महाभारत युद्ध के अंतिम दिन पर आधारित है। इसमें युद्ध और उसके बाद उत्पन्न समस्याओं का वर्णन किया गया है। इस नाटक के कुछ महत्त्वपूर्ण अंश इस प्रकार हैं- 1. टुकड़े टुकड़े हो बिखर चुकी मर्यादा उसको दोनों ही पक्षों ने तोड़ा है पांडव ने कुछ कम कौरवों ने कुछ ज्यादा (पहला अंक) 2. अधिकारों का अंधापन जीत गया जो कुछ सुंदर था, शुभ था, कोमलतम था वह हार गया..... द्वापर युग बीत गया। (पहला अंक) 3. अंधे राजा की प्रजा कहाँ तक देखें? (पहला अंक, प्रहरी) 4. देखेंगे कैसे वे? अंधे हैं! कुछ भी क्या देख सके अब तक वे? (प्रहरी-1) 5. मर्यादा मत तोड़ो तोड़ी हुई ...